मेरे दिन भर की तकलीफो
से क्यों इतना घबराती हैं ?
अरे ! मेरे काम की जिम्मेदारियों में ,
तू अपनी नींद क्यों उड़ाती हैं ?
तू चिंता ना कर !
तेरी ही परवरिश का ही नतीजा हूँ मैं,
कठीनाईओ झेलना जानता हूँ।
कर लूंगा सारे मुकाम हासिल मैं एक दिन ,
माँ ! तेरा ही तो बीटा हूँ।
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माधव आहूजा
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