मेहनत
मेरी उम्मीदें, मेरी ख्वाइशों ने मिलकर
मेरे लिए एक आशियाना सजाया है ,
कत्रा -कत्रा मेहनत कर मैंने खुद को उस फिर लायक बनाया हैं।
यूँ तो उड़ जाते हैं कुछ नादान परिन्दे अपनी ही जमीन को छोड़के ,
चन्द दानों की आड़ में ,
मैंने उस जमीन पर रहके खेत सोने का उगाया हैं।
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